बुधवार, 23 मई 2012

अजमेरी शाही सन्दल 20 मई को निकलेगा
सूफियों के सरदार हिंदल वली हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती का दर ऐसा मरकज है, जहां हर मजहब के लोग दिली मुरादों की झोली फैलाए आते हैं। जब जाते हैं तो उनके चेहरे पर सुकून साफ देखा जा सकता है। उर्स के मौके पर बरस रहे नूर के साथ ही महफिल ए समां में रूहानी खजानों के मुंह खुल जाते हैं। यहाँ कोई कानून कोई सरहदें नहीं, यहाँ कोई जात-पात नहीं चलती, यहाँ सिर्फ इन्सानियत को मानने वाले लोग आते हैं। और ख्वाजा से अपनी दिली मुराद पाते हैं, यही कारण हैं कि यहाँ आने वालों में हिन्दु मुस्लिम सिक्ख ईसाई और सभी धर्म के लोग होते हैं।
गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी हिंदल वली हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती र.अ. की दरगाह अजमेरी शरीफ (राजस्थान) में पेश होने वाली शाही सन्दल आगामी 20 मई को संध्या 4 बजे मदरसा निजामियाँ जय स्तंभ चौक, सरायपाली से बड़े ही अकीदत व शानो शौकत के साथ निकाला जावेगा। मुस्लिम समाज के युवकों से प्राप्त जानकारी के अनुसार समाज के प्रबुद्धजनों एवं युवाओं के द्वारा गत 3 वर्षों से शाहीं सन्दल जलसे का आयोजन किया जा रहा है। विदित हो कि हजरत ख्वाजा गरीब नवाज के उर्स की तैयारियाँ अजमेर शरीफ में पूर्ण हो चुकी है, आगामी  22 मई 2012 से अजमेर शरीफ में ख्वाजा गरीब नवाज के उर्स प्रारंभ होने वाली है।
मुस्लिम समाज एवं मुस्लिम यूथ के इस जलसे में 19 मई 2012 को मदरसा निजामियां में तकरीर का प्रोग्राम रखा गया है एवं 20 मई को संध्या 4 बजें संदल जुलुस निकाली जानी है। इस जलसे को लेकर बच्चों एवं युवाओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। युवा साथियों ने एक स्वर में कहा कि इस जलसे में सभी कौम के लोक शामिल होकर कौमी एकता की मिसाल पेश करते हैं।

मंगलवार, 15 मई 2012

नगर में टे्रेफिक व्यवस्था बदहाल

नेशनल हाईवे 52 से गुजरते वाहनों के कारण इस मार्ग पर दिन में कई बार जाम की स्थिति बन जाती है। इस मार्ग पर यात्री बसों का ठहराव होने के साथ ही ट्रैक्टर, टैंपो आदि भारी वाहन भी यहीं से गुजरते हैं। ऐसे में यहां कई बार जाम की स्थिति बन जाती है तथा जाम से वाहन निकालते समय कई बार खलासी आपस में उलझ जाते हैं।
मेन रोड, पदमपुर रोड तथा जय स्तंभ चौक में दिन में कई बार लगने वाले जाम से वाहन चालकों को निजात दिलाने के लिए यहां पर पुलिस भी नजर नहीं आती है। ट्रेफिक व्यवस्था इतनी बदहाल हो गई है कि टैक्सी व अन्य वाहन चालक बीच मार्ग में अपना वाहन खड़ा कर देते हैं। प्रशासन की ओर से ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के लिए कोई प्रयास नहीं किए जाने का खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ता है।
कस्बे में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के संबंध कई बार समाचार प्रकाशित किया जा चुका है वहीं जनप्रतिनिधियों व नाकरिकों की ओर से भी ट्रेफिक व्यवस्था सुधार के संबंध में विभिन्न स्तरों पर मांग की गई लेकिन व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाया। पदमपुर रोड को सरायपाली का सबसे व्यस्त रोड कना अतिशियोक्ति नहीं होगी, व्यापारियों के द्वारा अपना सामान रोड में फैला कर रखा जाता है, खासकर मंगलवार के दिन को यहाँ का ट्रेफ्रिक और भी बदहाल हो जाता है।

जगह जगह अघोषित बस स्टैण्ड

बस संचालकों के द्वारा मार्ग पर मनमर्जी से वाहन खड़े कर दिए जाते हैं। नगर पंचायत व पुलिस प्रशासन में आपसी समन्वय के अभाव के चलते आमजन को परेशानी उठानी पड़ती है। मेन रोड, जय स्तंभ चौक के आस पास बस रूकते हैं, यहाँ अक्सर बड़ी गाडिय़ाँ भी जाम हो जाया करती हैं, स्थानीय चौक में बैंक के आ जाने के कारण और भी भीड़ - भाड़ बढ़ गया है, जहाँ जाम देखना आम बात हो गया है।
तीन नहीं चार - चार बाईक सवारों से परेशानियाँ बढ़ी
वैसे तो मोटरसायकल पर तीन सवारी देखना आम बात है पर यहाँ तो चार - चार सवारियाँ बैठक अपने और दूसरों की जान को जोखिम में डालने से भी राहगीर कोई गुरेज नहीं करते। नौसिखियों के द्वारा वाहन चलाने की बढ़ती प्रवृत्ती के कारण भी दुर्घटनाओं में ईजाफा हो रहा है। आये दिन रोज नाना के प्रकार के भिडं़त और दुर्घटनाएँ प्रकाश में आती हैं।

टेक्ट्रर, जीप, कमाण्डर में ठूंसे जाते हैं

कृषि कार्य के लिए गये ट्रेक्टर में पूरे के पूरे ग्रामवासी ठूंस कर मार्केंटिंग करने शहर आते हैं। टे्रक्टर ट्रॉली में महिलाएँ, बच्चे, बुजुर्ग और साथ ही बड़े स्टाईलिस तरीके से बैठने वाले युवाओं की कमी नही होती। अब आप ही खुद अनुमान लगा लिजिए की यदि ये वाहन दुर्घटनाग्रस्त होते हैं तो उसमें विराजमान यात्रियों का क्या हाल होगा। ट्रॉली पलटने की घटना अक्सर सुनाई में भी आते रहते हैं।

बुधवार, 2 मई 2012

स्वास्थ्य पर मंडराता मोबाईल रेडियेशन का खतरा

स्वास्थ्य पर मंडराता मोबाईल रेडियेशन का खतरा

सरायपाली l मोबाइल फोन ने किस तरह जिंदगी में जगह बनाई है, वह देखना एक सुखद अनुभव है. कैसे कोई चीज जिंदगी की जरूरत बन जाती है- वह मोबाइल के बढ़ते प्रयोगों को देखकर लगता है। कैसे कोई चीज जिंदगी की जरूरत बन जाती है, वो मोबाइल के बढ़ते प्रयोगों को देखकर लगता है. वह हमारे होने, जीने में सहायक बन गया है। पुराने लोग बता सकते हैं कि मोबाइल के बिना जिंदगी कैसी रही होगी। किंतु आज यह मोबाइल खतरेजान हो गया है, क्या मोबाइल के बिना जिंदगी संभव है ? जाहिर है जो इसके इस्तेमाल के आदी हो गए हैं उनके लिए यह एक बड़ा फैसला होगा, पर मोबाईल एवं उसके टावरों से निकलने वाले रेडियेशन (विकिरण) के खतरे को भी हम कम नहीं आंक सकते, वह किस तरह अपने विकिरण से लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल रहा है। रेडियेशन के प्रभावों के चलते आदमी की जिंदगी में कई तरह की बीमारियां घर बना रही हैं वह इससे जूझने के लिए विवश है। जाहिर तौर पर यह एक ऐसा विषय है जिस पर व्यापक विमर्श आवश्यक ही नहीं अत्यावश्यक है। मोबाइल के प्रयोगों को रोका तो नहीं जा सकता हां कम जरूर किया जा किया जा सकता है। इसके लिए ऐसी तकनीकों का उपयोग हो जो कारगर हों और रेडियेशन के खतरों को कम करती हों। आज शहरों ही नहीं गांव-गांव तक मोबाइल के फोन हैं और खतरे की घंटी बजा रहे हैं। लोगों की जिंदगी में इसकी एक अनिवार्य जगह बन चुकी है। इसके चलते लैंडलाइन फोन का उपयोग कम होता जा रहा है और उनकी जगह मोबाइल फोन ले रहे हैं। ये फोन आज जरूरत हैं और फैशन भी। नयी पीढ़ी तो अपना सारा संवाद इसी पर कर रही है, उसके होने जीने और अपनी कहने-सुनने का यही माध्यम है।  इसके अलावा नए मोबाइल फोन अनेक सुविधाओं से लैस हैं वे एक अलग तरह से काम कर रहे हैं और नई पीढी को आकर्षित करने का कोई अवसर नहीं छोड़ते। इसके अलावा नए मोबाइल फोन अनेक सुविधाओं से लैस हैं वे एक अलग तरह से काम कर रहे हैं और नई पीढी को आकर्षित करने का कोई अवसर नहीं छोड़ते. ऐसे में सूचना और संवाद की यह नयी दुनिया मोबाइल फोन ही रच रहे हैं। आज वे संवाद के सबसे सुलभ, सस्ते और उपयोगी साधन साबित हो चुके हैं। वे दरअसल हमारे एकांत के साथी बन चुके हैं. वे एक ऐसा हमसफर बन रहे हैं जो हमारे एकांत को भर रहे हैं वो भी चुपचाप। ऐसे में इस स्व चलित दुरभाष यंत्र के प्रयोगों से छुटकारा तो नामुमकिन है और इसका विकल्प यही है कि हम ऐसी तकनीको से बने फोन का इस्तेमाल करें या अपनाएं जिनमें रेडियेशन का खतरा कम हो, या नगण्य हो  हालांकि इससे मोबाइल कंपनियों को एक नया मार्केट मिलेगा और अंतत: लोग अपना फोन बदलने के लिए मजबूर होंगें।
भारत के लिए मोबाइल फोन विकिरण इसलिए भी खतरे की घंटी है, क्योंकि यहां का दूरसंचार उद्योग दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ रहा है और वायरलेस कनेक्शनों की संख्या के मामले में यह विश्व में दूसरा सबसे बड़ा दूरसंचार नेटवर्क है। मोबाइल फोन उपभोक्ताओं की संख्या में हर माह लगातार बढ़ोतरी हो रही है। मोबाईल रेडियेशन के कुछ अन्य गैर ऊष्मीय प्रभाव जैसे सिर की त्वचा पर जलन व सिहरन, थकान, निद्रा में बाधा, चक्कर आना, एकाग्रता में कमी, कानों में घंटियां बजना, प्रतिक्रिया देने में वक्त लगना, याददाश्त कम होना, सिरदर्द, पाचन तंत्र में गड़बड़ी, दिल की धड़कन बढऩा इत्यादि भी संभव हैं। चिडिय़ा-गौरेया, मधुमक्खी, तितली, आदि कीटों की संख्या में कमी के लिए भी मोबाइल टावर से होने वाले रेडियेशन बहुत हद तक जिम्मेदार हैं. मोबाइल फोन रेडियो तरंगों के माध्यम से सिग्नल प्रेषित करते है। इन रेडियों तरंगों में रेडियो फ्रिच्ेंसी एनर्जी होती है जो इलेक्ट्रोमेग्नेटिक रेडिएशन का ही एक रूप है। मोबाइल हैंडसेट के भीतर मौजूद सर्किट्स और उसके एंटिना से विकिरण संचारित होता है। यह विकिरण सभी दिशाओं में फैलता है, कहीं कम, कहीं ज्यादा। मोबाइल फोन का उपयोगकर्ता इस विकिरण का कितना हिस्सा अवशोषित करेगा, यह नेटवर्क में डिजिटल सिग्नल कोडिंग, एंटिना की डिजाइन और सिर के सापेक्ष उसकी स्थिति जैसे कई कारकों का निर्भर करेगा। 

विकिरण पर शोध

विकिरण दो प्रकार के होते हैं। एक, आयनीकारक विकिरण जिनसे टकराकर परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन निकल जाते हैं और ऑयन का निर्माण होता है। (जैसे एक्स-रे)। दूसरा, गैर-आयनीकारक विकिरण जिसमें आमतौर पर इलेक्ट्रॉन अलग नहीं होते हैं। यह उतना घातक नहीं माना जाता जितना कि आयनीकारक विकिरण होता है। इसमें वस्तु की सतह केवल मर्ग होती है। मोबाइल फोन और मोबाइल फोन टॉवरों से निकलने वाला विकिरण गैर-अयनीकारक होता है।
गैर-आयनीकारक विकिरण के साथ चिंता यह है कि इसका असर लंबे समय तक हो सकता है। हालांकि यह ऊतकों को तत्काल नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन जानकार इस बात को लेकर पक्के तौर पर कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है कि इस विकिरण के लगातार प्रभाव से किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
मोबाइल फोन के विकिरण का सबसे जाना-माना प्रभाव ऊष्मीय प्रभाव है जिसमें गर्मी संबंधी अधिकांश प्रभाव सिर की सतह पर होते हैं। ऊष्मीय प्रभाव मानव ऊतकों को उसी तरह गर्म करने की क्षमता रखता है, जैसे किसी माइक्रोवेव ओवन में खाना गर्म होता है। इसमें तापमान में बढ़ोत्तरी उससे भी कम होती है जितनी धूप में सिर खुला रहने पर होती है। मस्तिष्क के रक्तसंचार में यह क्षमता होती है कि वह खून के प्रवाह में बढ़ोत्तरी कर अतिरिक्त गर्मी के असर को खत्म कर सके। हालांकि आंख के कॉर्नियां में तापमान के नियंत्रण की कोई व्यवस्था नहीं होती है।
भारत के लिए मोबाइल फोन विकिरण इसलिए भी खतरे की घंटी है, क्योंकि यहां का दूरसंचार उद्योग दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ रहा है और वायरलेस कनेक्शनों की संख्या के मामले में यह विश्व में दूसरा सबसे बड़ा दूरसंचार नेटवर्क है। मोबाइल फोन उपभोक्ताओं की संख्या में हर माह लगातार बढ़ोतरी हो रही है। गौरतलब है कि भारत में टॉवरों की स्थापना को लेकर कोई नियंत्रण नहीं है। यही वजह है कि हमारे शहरों में टॉवर या एंटिना का बहुत ही अव्यवस्थित जाल-सा बिछामिलेगा। मोबाइल टॉवर भी जगह-जगह कुकुरमुत्तें की तरह उगे जा रहे हैं।

मंगलवार, 1 मई 2012

चिल्हर समस्या बनी आफत

सरायपाली । नगर में इन दिनों चिल्हर की विकराल समस्या बनी हुई है। पूरे बाजार में व्यापारी से लेकर ग्राहक तक चिल्हर की समस्या से परेशान है।  पहले 1, 2 व 5 के सिक्के और नोट विलुप्त हो गये अब 10 से लेकर 20 के नोट भी मार्केट से पूरे गायब हो चुके हैं। व्यायसायिक केन्द्रों, दुकान, होटन, पान ठेलों आदि पर 5-10 रूपये के चिल्हर वापस नहीं किये जाने की शिकायत आम है। चिल्हर के बदले राउन्डफिगर करने कहा जाता है या फिर शैम्पू, चॉकलेट, टॉफी, राजश्री, पेन आदि दे दिया जाता है, जिससे दुकानदार को फायदा तो होता ही है, वहीं उपभोक्ता में आक्रोश बढ़ा है। बड़े-बड़े दुकान, मोबाईल दुकान, किराना दुकान, पान ठेलों में चिल्हर वापन न करने का खेल खेला जा रहा है। मोबाईल के रिजार्च अक्सर नॉट राउन्डनगफिर होने के कारण अक्कर 39, 24, 49, 55 आदि के होते हैं जहाँ दुकानदार को पूरे नोट देने के बाद 1 से 10 रूपये तक के कोई हिसाब नहीं रखते और न ही वापस करते, चिल्हर मांगने पर नोट वापस कर कहते हैं कि जाओ चिल्हर लेकर आओ, अब आम आमदी जाये तो जाये कहाँ ? किराना दुकान व्यापारियों ने बताया कि लोग आजकल 5 से 10 रुपए का सामान खरीदने 20 रुपए या 50 रुपए के नोट लेकर आते है जिससे लेन-देने में काफी परेशानी होती है। हमें मजबूरन ग्राहकों को वापस करना पड़ता है। वहीं खबर है कि कुछ होटल मालिक अपने आस-पास पान ठेला वालों से संपर्क कर कूपन सिस्टम चला रहे हैं। दुकान में सामान खरीदने जाओ तो दुकानदार पहले चिल्हर के बारे में पूछता है यदि चिल्हर ना हो तो दुकानदार जबरदस्ती दो रुपए की जगह पांच रुपए का सामान देता है चिल्हर न होने के कारण ग्राहकों को जबरन अतिरिक्त सामान लेना पड़ता है। नागरिकों के कड़े विरोध, बार-बार समाचार पत्रों में सामाचार प्रकाशित होने एवं जनप्रतिनिधियों के द्वारा बैंक अधिकारियों को समस्याओं से अवगत कराने के बावजूद भी इस दिशा में कोई सुधार नहीं हुआ है। कुछ नागरिकों का कहना है कि जानबूझकर चिल्हर की कमी कृत्रिम रूप से बनायी जाती है। तो कोई कहता है कि घर में महिलाएँ एवं बच्चे अपने गुल्लक में चिल्हर जमा कर लेते हैं जो कि उनके लिए बचत का एक छोटा सा माध्यम है, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सिक्कों की जमाखोरी लालच के कारण करते हैंं ताकि उसे बट्टे में दे सकें। जिससे ये समस्या उत्पन्न होती है। चिल्हर के बदले सामान थमाने से आम नागरिक, महिलाएं सभी त्रस्त हैं, कहीं देखते ही देखते इसी कारण आम नागरिक आक्रोशित न हो जाये इस ओर ध्यान देकर बैंक व शासन को चिल्हर समस्या हेतु आवश्यक कदम उठाने होंगे।

सोमवार, 30 अप्रैल 2012

फर्जी आईडी की सीम बनी आफत

सरायपाली। ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में कुछ बेपरवाह मोबाईल दुकान संचालक एक ही आई डी से कई सारे सिम कार्ड जारी कर देते हैं, फर्जी आईडी से मोबाईल सिम खरीदने और बेचने वालों  पर कार्यवाही न होना इनके हौसलों को और बुलंद करता है। सरायपाली क्षेत्र में संचालित मोबाईल दुकानों में कुछ ऐसे भी दुकान संचालक हैं जो सिम कार्ड बिना आई डी प्रूफ के जारी कर देती है, कुछेक दुकानों को छोड़ दिया जाये तो बाकी सारे दुकानदारों के द्वारा सिम कार्ड जारी करने हेतु कोई ठोस प्रमाण नहीं लिया जाता, बिना फार्मेल्टी के ही सिम कार्ड जारी कर दिया जाता है और ग्राहक से कहा जाता है कि बाद में फार्मेल्टी जमा करवा देना, परन्तु वो ग्राहक वापस आता ही नहीं, अंतत: मोबाईल दुकान संचालक उसे किसी के भी नाम से जारी करवा देता है। और उसी नम्बर से वो उपभोक्ता बेधड़क किसी से भी गाली-गलौज करता है, एव ऐसा करते हुए उसे किसी बात का डर नहीं रहता क्योंकि मोबाईल सिम में फार्मेल्टी तो किसी और के नाम की होती है। किसी को डराने या चमकाने के लिए अपराधी प्रवृत्ती के लोग फर्जी सिम का सहारा लेते हैं। बेधड़क गाली-गलौच करते हैं, आज भी अगर थाना में पता किया जाय तो अनगिनत ऐसे कई केश है जिसमें फोन से गाली-गलौच और जान से मारने की धमकी दी गई है, पर पूख्ता साक्ष्य के अभाव के कारण उनपर कोई कार्यवाही नहीं होती।
किसी भी अपराधी को पकडऩे या आवश्यक कार्य हेतु जब मोबाईल का लोकेशन ट्रेस किया जाता है तो पुलिस वालों का भी पसीना छूट जाता है सिम किसी और के नाम होता है और उसे चलाता कोई और है। अगर यदि ईमानदारी से जितने भी मोबाईलधारियों का आईडी चेक किया जावे तो नतीजे चौकाने वाले होंगे। बात अगर सुरक्षा की हो या कायदे कानून की, मोबाईल कम्पनी एवं बिना आईडी प्रूफ के सिम कार्ड बेचने वाले दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की अदद दरकार है।

ये भी ठीक कही.....

चाहते तो हैं, करें इजहार-ए-मुहब्बत 

पर, अब किसी पे एतबार नहीं होता !

सरायपाली / पतेरापाली. देश को अपना सबकुछ न्यौछावर कर देने वाले सच्चे सुपुत जब इस मतलब परस्त दुनियाँ से बिदा लेते हैं तो बस एक बात ही कहते हैं, कर चलें हम फिदा जान-ओ-तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो।  शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पे परने वालों का यही बाकि निशां होगा, पर क्या शासन ने इस तथ्य को भूला दिया ? देश के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले जवान को शहीद कहा जाता है, उन्हे शहीदी के सम्मान दिया जाना चाहिए। परन्तु पतेरापाली के सच्चे सपूत जिसने रणभूमि में अत्यारियों और दुश्मनों के खिलाफ जमकर मोर्चा संभाला और वीरगती को प्राप्त किया आज उनको याद करने वाले सिर्फ परिवार और पास - पड़ौस के आलावा और कोई भी नहीं। जनप्रतिनिधियों को सिर्फ वादा करना आता है, उन्हे पूरा करना तो वो शायद ही जानते हो, उपर से सुस्त प्रशासन। देश के लिए शहीद होने वाले जवानेां के साथ छत्तीसगढ़ प्रशासन इस तरह संवदेनहीन हो जाएगा, इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी।
7 जनवरी को 2005 को जिला बलरामपुर सरगुजा में नक्सली मुठभेड़ में शहीद ग्राम पतेरापाली के ललित बुड़ेक बचपन से ही देश भक्ति से ओतप्रोत थे, देशप्रेम मानों उनके रग-रग में बसा हुआ था, उनकी शहादत को आज लगभत सात सात हो गये परन्तु आज तक उनके नामकरण से मूर्ति की स्थापना नहीं की जा सकी, उक्त शहीद जवान की स्मृति में जनता की भावनाओं के आलोक में आज पर्यन्त तक स्मारक का निर्माण अधूरा रखा गया है। पतेरापाली ग्राम के चौक में सभी कार्य को पूर्ण रूप से अंजाम दे दिये जाने के बाद भी शहीद की मूर्ति को स्थापित न करना  शहीद के सम्मान को ठेंस पहुंचाने से कतई कम नही है। पतेरापाली के ग्रामीणों ने शासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इस ओर प्रशासन ध्यान दे एवं शहीद चौक का कार्य पूर्ण कर हमारे गाँव के सपूत शहीद ललित बुड़ेक की शहादत को अनदेखा न करे, यही सही मायनों में सच्ची श्रद्धांजली होगी।