सोमवार, 30 अप्रैल 2012

चाहते तो हैं, करें इजहार-ए-मुहब्बत 

पर, अब किसी पे एतबार नहीं होता !

सरायपाली / पतेरापाली. देश को अपना सबकुछ न्यौछावर कर देने वाले सच्चे सुपुत जब इस मतलब परस्त दुनियाँ से बिदा लेते हैं तो बस एक बात ही कहते हैं, कर चलें हम फिदा जान-ओ-तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो।  शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पे परने वालों का यही बाकि निशां होगा, पर क्या शासन ने इस तथ्य को भूला दिया ? देश के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले जवान को शहीद कहा जाता है, उन्हे शहीदी के सम्मान दिया जाना चाहिए। परन्तु पतेरापाली के सच्चे सपूत जिसने रणभूमि में अत्यारियों और दुश्मनों के खिलाफ जमकर मोर्चा संभाला और वीरगती को प्राप्त किया आज उनको याद करने वाले सिर्फ परिवार और पास - पड़ौस के आलावा और कोई भी नहीं। जनप्रतिनिधियों को सिर्फ वादा करना आता है, उन्हे पूरा करना तो वो शायद ही जानते हो, उपर से सुस्त प्रशासन। देश के लिए शहीद होने वाले जवानेां के साथ छत्तीसगढ़ प्रशासन इस तरह संवदेनहीन हो जाएगा, इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी।
7 जनवरी को 2005 को जिला बलरामपुर सरगुजा में नक्सली मुठभेड़ में शहीद ग्राम पतेरापाली के ललित बुड़ेक बचपन से ही देश भक्ति से ओतप्रोत थे, देशप्रेम मानों उनके रग-रग में बसा हुआ था, उनकी शहादत को आज लगभत सात सात हो गये परन्तु आज तक उनके नामकरण से मूर्ति की स्थापना नहीं की जा सकी, उक्त शहीद जवान की स्मृति में जनता की भावनाओं के आलोक में आज पर्यन्त तक स्मारक का निर्माण अधूरा रखा गया है। पतेरापाली ग्राम के चौक में सभी कार्य को पूर्ण रूप से अंजाम दे दिये जाने के बाद भी शहीद की मूर्ति को स्थापित न करना  शहीद के सम्मान को ठेंस पहुंचाने से कतई कम नही है। पतेरापाली के ग्रामीणों ने शासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इस ओर प्रशासन ध्यान दे एवं शहीद चौक का कार्य पूर्ण कर हमारे गाँव के सपूत शहीद ललित बुड़ेक की शहादत को अनदेखा न करे, यही सही मायनों में सच्ची श्रद्धांजली होगी।

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