ठेले पर बेखौफ धड़ल्ले से बिक रहा - मीठा ज़हर
0 मासुमों में तकसीम कर रहा बीमारियाँ
0 माँ-बाप, शासन-प्रशासन अनजान
गर्मी पडऩे के साथ ही सड़कों पर ठेले-खोमचों पर शीतल पेय पदार्थो व ठंडे तासीर वाले कटे -फटे फलों की बिक्री प्रारंभ हो गयी है। रंग बिरंगे दिखने वाले ये स्वीट पाईजन जहाँ मासुमों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं वहीं इन पदार्थो पर भिनभिनाती मक्खियां तमाम बीमारियों को न्योता भी दे रही हैं। मासुम बच्चे व राहगीर हलक तर करने के लिए इन दुकानों पर पहुंच कर तमाम संक्रामक रोगों की चपेट में आ रहे हैं। बीमारियां बेचने वाले इन ठेलों के खिलाफ स्वास्थ्य महकमा कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है और न ही कोई जाँच कर रहा। विदित हो कि कुछ दिनों से मौसम में एकाएक गर्मी आ गयी है। गर्मी की आहट से जिले सहित छोटी-छोटी बाजारों में गन्ने व आम का रस, रंग-बिरंगे बोतलों में शर्बत व शीतल तासीर करने वाले पाउच पेप्सी, आईस्क्रीम आदि की बिक्री ठेले-खोंमचों पर की जा रही है। इन खाद्य व पेय पदार्थो पर भिनभिनाती मक्खियां संक्रामक रोगों को दावत दे रहीं हैं। इतना ही नहीं जूस के नाम पर केमिकल, सेक्रीन की धड़ल्ले से बिक्री की जाती है। चिकित्सा क्षेत्र के जानकार बताते हैं कि ठेले-खोंमचे पर बिक रहे इन खाद्य पदार्थो से संक्रामक बीमारियों की संभावना अधिक होती है। उन्होंने कहा कि इन पदार्थो पर भिनभिनाती मक्खियां और दूषित बर्फ बीमारियों के सबसे बड़े वाहक होते हैं। बीमारियां बेचने वाले लोगों के खिलाफ अभियान चलाकर शीघ्र ही कार्रवाई करनी चाहिए। हमारे संवाददाता के अनुसार जिले सहित आस-पास के इलाकों में कटे-फटे फल के सेवन से ग्रामीण विभिन्न बीमारियों की चपेट में फंस रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा इनके खिलाफ कार्रवाई का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। सड़े-गले फल, दूषित खाद्य पदार्थो पर भिनभिनाती मक्खियां संक्रामक रोगों के वाहक के रूप में काम करती हैं। इन पदार्थो का सेवन करने वाला व्यक्ति बीमारियों की चपेट में तेजी से आ रहा है।
जिले सहित पूरे क्षेत्र में लगभग आधा सैकड़ा बर्फ फेक्ट्री संचालित हैं, जहाँ से रंग बिरंगे आईस्क्रीम पाउच पेप्सी, बर्प गोला आदि बनाया जाता है, नाना प्रकार के केमिकल, शर्करीन आदि का इस्तेमाल कर बनाये जाने वाले ठंडे पदाथों की ओर बच्चे सहित युवा भी जल्दी आकर्षित होते हैं। क्या इन फेक्ट्रीयों ने सुरक्षा का क्या मापदण्ड अपनाया है, क्या इनके द्वारा बनाये गये पदार्थ बच्चों एवं युवाओं के लिए सुरक्षित है। प्रशासन को चाहिए की इस ओर भी ध्यान देकर उचित कदम उठावे।
achha lekh hai...
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