मंगलवार, 1 मई 2012

चिल्हर समस्या बनी आफत

सरायपाली । नगर में इन दिनों चिल्हर की विकराल समस्या बनी हुई है। पूरे बाजार में व्यापारी से लेकर ग्राहक तक चिल्हर की समस्या से परेशान है।  पहले 1, 2 व 5 के सिक्के और नोट विलुप्त हो गये अब 10 से लेकर 20 के नोट भी मार्केट से पूरे गायब हो चुके हैं। व्यायसायिक केन्द्रों, दुकान, होटन, पान ठेलों आदि पर 5-10 रूपये के चिल्हर वापस नहीं किये जाने की शिकायत आम है। चिल्हर के बदले राउन्डफिगर करने कहा जाता है या फिर शैम्पू, चॉकलेट, टॉफी, राजश्री, पेन आदि दे दिया जाता है, जिससे दुकानदार को फायदा तो होता ही है, वहीं उपभोक्ता में आक्रोश बढ़ा है। बड़े-बड़े दुकान, मोबाईल दुकान, किराना दुकान, पान ठेलों में चिल्हर वापन न करने का खेल खेला जा रहा है। मोबाईल के रिजार्च अक्सर नॉट राउन्डनगफिर होने के कारण अक्कर 39, 24, 49, 55 आदि के होते हैं जहाँ दुकानदार को पूरे नोट देने के बाद 1 से 10 रूपये तक के कोई हिसाब नहीं रखते और न ही वापस करते, चिल्हर मांगने पर नोट वापस कर कहते हैं कि जाओ चिल्हर लेकर आओ, अब आम आमदी जाये तो जाये कहाँ ? किराना दुकान व्यापारियों ने बताया कि लोग आजकल 5 से 10 रुपए का सामान खरीदने 20 रुपए या 50 रुपए के नोट लेकर आते है जिससे लेन-देने में काफी परेशानी होती है। हमें मजबूरन ग्राहकों को वापस करना पड़ता है। वहीं खबर है कि कुछ होटल मालिक अपने आस-पास पान ठेला वालों से संपर्क कर कूपन सिस्टम चला रहे हैं। दुकान में सामान खरीदने जाओ तो दुकानदार पहले चिल्हर के बारे में पूछता है यदि चिल्हर ना हो तो दुकानदार जबरदस्ती दो रुपए की जगह पांच रुपए का सामान देता है चिल्हर न होने के कारण ग्राहकों को जबरन अतिरिक्त सामान लेना पड़ता है। नागरिकों के कड़े विरोध, बार-बार समाचार पत्रों में सामाचार प्रकाशित होने एवं जनप्रतिनिधियों के द्वारा बैंक अधिकारियों को समस्याओं से अवगत कराने के बावजूद भी इस दिशा में कोई सुधार नहीं हुआ है। कुछ नागरिकों का कहना है कि जानबूझकर चिल्हर की कमी कृत्रिम रूप से बनायी जाती है। तो कोई कहता है कि घर में महिलाएँ एवं बच्चे अपने गुल्लक में चिल्हर जमा कर लेते हैं जो कि उनके लिए बचत का एक छोटा सा माध्यम है, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सिक्कों की जमाखोरी लालच के कारण करते हैंं ताकि उसे बट्टे में दे सकें। जिससे ये समस्या उत्पन्न होती है। चिल्हर के बदले सामान थमाने से आम नागरिक, महिलाएं सभी त्रस्त हैं, कहीं देखते ही देखते इसी कारण आम नागरिक आक्रोशित न हो जाये इस ओर ध्यान देकर बैंक व शासन को चिल्हर समस्या हेतु आवश्यक कदम उठाने होंगे।

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